[2021] अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध | Essay on Space Travel in hindi

नमस्कार पाठकों, आज के इस लेख में हम अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध लिखेंगे और आपको essay on space travel in hindi से संबंधित पूरी जानकारी मिलेगी।

मित्रों मानव के द्वारा अंतरिक्ष में बहुत समय से यात्रा की करी जा रही है। अंतरिक्ष को समझने का काम मानव ने आधुनिक युग में गैलीलियो के बाद किया था, जिन्होंने अंतरिक्ष को समझने के तौर पर अपना बहुत अधिक योगदान दिया है। गैलीलियो को अपने समय में लोग पागल कहते थे, क्योंकि वह  नव ग्रहों के बारे में बात करते थे।

लेकिन उनके बताए गए विशिष्ट उपक्रमों को लेकर ही आज के समय कई ऐसे वैज्ञानिक है जो गैलीलियो को अपना गुरु मानते हैं, और गैलीलियो के बाद में हम ने विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की अंतरिक्ष की खोज को आगे बढ़ाया है, जिसमें एक खोज का परिणाम अंतरिक्ष की यात्राएं भी है।

हमने विभिन्न प्रकार के अंतरिक्ष यात्री करना शुरू कर दिया है, यह सभी जानते हैं कि सबसे पहले अंतरिक्ष यात्रा रूस ने करी थी। लेकिन इसके बारे में भी लोगों को कुछ ज्यादा जानकारी नहीं है, इसीलिए आज के लेख में हम आपको मानव के द्वारा करी गई अंतरिक्ष यात्राओं के बारे में पूरी जानकारी देंगे कि, मानव ने अपनी प्रथम अंतरिक्ष यात्रा कब करी, इसके पश्चात करी गई कुछ यादगार अंतरिक्ष यात्राओं के बारे में आपको जानकारी देंगे, और मानव के द्वारा देखी गई कुछ रहस्यमई चीजों के बारे में आपको आज के लेख में हम जानकारी देंगे। 

अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध
अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध

तो चलिए शुरू करते हैं-

अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध

#1 स्पूतनिक 1 सैटलाइट

आधुनिक युग के  मानव इतिहास में मानव के द्वारा पृथ्वी पर छोड़ा गया यह पहला सेटेलाइट था जिसे 4 अक्टूबर 1957 को USSR अर्थात यूनियन ऑफ सोवियत सोशियल रिपब्लिक ने लांच किया तथा यह पहला मानव निर्मित एक यंत्र था जो पृथ्वी के वातावरण से दूर भेजा गया। इसका वजन 83 किलो था तथा इसे एक यादगार उपलब्धि के रूप में याद किया जाता है।

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2 इसके बाद में आता है यूएस का जूपिटर मिसाइल

यूएस का जूपिटर मिसाइल  28 मई 1959 को छोड़ा गया था। इस मिशन के अंतर्गत दो बंदर जिनका नाम एबल और बेकर था, उन्हें अंतरिक्ष में भेजा गया था। वह पहले ऐसे जीवित प्राणी थे जो अंतरिक्ष में जा कर के वापस भी आ गए थे। इससे पहले स्पूतनिक 2 में USSR ने 1957 के अंतर्गत एक गली के कुत्ते को छोड़ा था, जिसका नाम लाइका था। लेकिन वह कुछ घंटों के अंतर्गत ही और हिटिंग और पेनिक के कारण मर गई।

यूएस का जुपिटर मिसाइल मिशन पहला ऐसा मिशन था जहां अंतरिक्ष में जीवित प्राणियों को भेजा गया और उन्हें जीवित वापस लाया गया।

3 इसके बाद में आता है USSR का वोस्तोक स्पेसक्राफ्ट

जब अमेरिका ने पहले ऐसे जीवो को भेजा जो जीवित अंतरिक्ष में जाकर के जीवित वापस आ गए तब USSR ने अपनी होड़ को पूरा करने के लिए इंसान को अंतरिक्ष में भेजा। उस इंसान का नाम यूरी गगारिन था। यूरी गगारिन USSR स्पेशल वायु सेना का एक कर्नल ऑफिसर था जिसे 12 अप्रैल 1961 में वोस्तोक स्पेसक्राफ्ट के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया था।

यूरी गगारिन ने लगभग 2 घंटे तक अपने  शटल से बाहर निकल कर के अंतरिक्ष में भ्रमण किया, तथा अंतरिक्ष को महसूस कियाइसी के साथ रूस वह पहला देश बना, जिसने एक जीवित व्यक्ति को अंतरिक्ष में भेजा तथा उसे जीवित वापस लाया। यूरिन का गाड़ी ने अंतरिक्ष में पृथ्वी का एक ऑर्बिट पूरा किया और वह तकरीबन 17000 माइल प्रति घंटे की स्पीड से गति कर रहे थे।

इस होड़ को पूरा करने के लिए अमेरिका ने मात्र कुछ दिनों में या 1 महीने से भी थोड़े कम समय में 5 मई 1961 को अपने एक देशवासी को अंतरिक्ष में भेजा जिसका नाम एलेन शेफर्ड था, उसे 5 मई 1961 को अंतरिक्ष में भेजा गया।

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#4 वोस्तोक 6

इसके बाद में USSR ने पहली महिला को अंतरिक्ष में भेजा, जिसका नाम वेलेंटीना टैरेशकोवा था। वेलेंटीना टैरेशकोवा एक पूर्व टेक्सटाइल  वर्कर थी, जिन्हें 16 जून 1963 को वोस्तोक सिक्स के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया था। उन्होंने 3 दिनों में पृथ्वी के 49 चक्कर काटे, तथा जब मैं लैंड कर रही थी उस समय वह थोड़ी इंजर्ड हो गई थी। यह अंतरिक्ष यात्राओं का वह खास पल था जब पहली बार किसी महिला को अंतरिक्ष में भेजा गया।

#5 व्होस्कोर्ड स्पेसक्राफ्ट,

इसके बाद में पहला स्पेसवॉक 18 मार्च 1965 को किया गया, जिसमें रूस के कॉस्मोनॉट  अलेक्सेई लियोनोव ने अपना पहला और मानव इतिहास का पहला स्पेसवॉक किया। अलेक्सेई लियोनोव को व्होस्कोर्ड स्पेसक्राफ्ट के द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया था, और उन्हें 18 मार्च 1965 को अंतरिक्ष में भेजा गया था तथा उन्होंने जब अपने स्पेसक्राफ्ट में वापस आना चाहा तो उन्हें बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अलेक्सेई लियोनोव ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह जीवित नहीं बच पाएंगे और अंतरिक्ष में ही रह जाएंगे।

#6 अपोलो 11 मिशन

इसके बाद वह ऐतिहासिक पल आता है जब मानव इतिहास में पहली बार किसी व्यक्ति ने चांद पर कदम रखा।

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20 जुलाई 1969 को वह दिन था जब नील आर्म स्ट्रांग बन्धन बैंक लोन जो कि अमेरिकन एस्ट्रोनॉट थे, उन्होंने चांद पर पहला कदम रखा तथा आर्मस्ट्रांग और एडविन यह दो अंतरिक्ष यात्री एस्ट्रोनॉट और थे, जिन्होंने तकरीबन चांद की परत के ऊपर या चांद की जमीन के ऊपर 2 घंटे बताएं।

जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर अपना पहला कदम रखा तब उन्होंने अपनी एक बात कही थी जो आज के समय विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा था कि “यह कदम मेरा एक छोटा सा कदम है और मानव इतिहास का बहुत बड़ा कदम है”

नील आर्मस्ट्रांग ने बताया कि चांद की परत ऐसी थी जैसे कि कोई कोयले का पाउडर बिछाया गया हों तथा जब उनका स्पेसक्राफ्ट लैंड करा गया था तो वह जमीन में 1 फुट नीचे घुस गया था यह मिशन 8 दिनों तक चला था।

#7 अपोलो 14

इसके बाद वह मौका आता है जब 7 फरवरी 1984 को, अपोलो 14 के मिशन के दौरान अमेरिका की तरफ से भेजे गए एस्ट्रोनॉट तथा Bruce McCandless जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। यह उड़ान ऐसी थी कि उन्होंने अपने स्पेसक्राफ्ट से पूर्णतया अलग होकर के अंतरिक्ष में उड़ने की कोशिश करी थी, और इसमें वह पूर्ण रुप से कामयाब भी हुए थे।

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इसके बाद से लेकर के आज तक कई ऐसे अंतरिक्ष यात्राओं के पल आए हैं जो मानव इतिहास के अंतरिक्ष यात्राओं में अपना अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, लेकिन यह कुछ ऐसे पल थे जो मानव इतिहास के अंतरिक्ष यात्रियों के दौरान सदा के लिए अमर हो गए।

निष्कर्ष

तो आज के लेख में हमने आपको बताया कि मानव के द्वारा अंतरिक्ष यात्राओं में किस प्रकार के योगदान दिए गए, तथा मानव के अंतरिक्ष यात्राओं का इतिहास क्या था, कौन-कौन से मिशन के अंतर्गत अंतरिक्ष यात्राओं को किया गया, उन्हें कब किया गया, और उनमें क्या विशेष बातें हुई।

आज के “अंतरिक्ष यात्रा पर निबंध” में आज हमने essay on space travel in hindi की बाते बताई। हम आशा करते हैं कि आपको ये लेख पसंद आया होगा। यदि पसंद आया हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

धन्यवाद!

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