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तेल के बढ़ते दामों पर निबंध | Rising Oil Rate Hindi Essay

नमस्कार पाठकों, आज की इस लेख में हम ऐसे चिंताजनक विषय पर बात करेंगे जिसको नियंत्रित करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। दोस्तों आज के इस लेख में हम तेल के बढ़ते दामों पर निबंध लिखेंगे।

तेल के बढ़ते दामों पर निबंध
तेल के बढ़ते दामों पर निबंध

जिसमें आप को विस्तारपूर्वक बताएंगे कि इस तेल के बढ़ते दामों का कारण क्या है और हमारे समाज में इसका क्या क्या प्रभाव पड़ रहा है और ये तेल के दाम किस कारण से बढ़ रहे हैं।

इन सब विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी देंगे। तो चलिए शुरू करते हैं और जानते है की आखिर ये तेल के दाम इतने तेज़ी से क्यों बढ़ रहे है और इसे कैसे रोका जा सकता है।

तेल के बढ़ते दामों पर निबंध

प्रस्तावना

भारत में तेलों के दाम इस तरह आकाश छू रहे हैं कि यह सभी के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है जिसके चलते निम्न वर्ग के लोगों के लिए तेल के दाम सोने चांदी की तरह हो गए है और वे अपनी छोटी सी आमदनी से इसको नहीं खरीद पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में तेल की खपत और देशों के मुक़ाबले कहीं ज्यादा है इसलिए ये काफी जटिल समस्या है।

ये परेशानी जितनी सरल प्रतीत हो रही है उतनी ही जटिल है। तेलों के बढ़ते दाम के कारण निम्न वर्ग व समान वर्ग के लोगों को उचित रूप से पौष्टिक आहार भी नहीं मिल पा रहा है।

बढ़ती समस्याएं कौन कौन सी है?

दुनिया में दूसरा सबसे आबादी वाला देश भारत जिसमें करीब 135 करोड़ से भी ज्यादा लोग निवास करते हैं तो स्वाभाविक है कि तेल की खपत अवश्य होगी। अब इससे बढ़ती परेशानी ये है कि निम्न वर्ग के लोगों को उचित रूप से भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर पेट्रोल के दाम में भी आग लगी हुई है। पेट्रोल के दाम शतक पार कर गए हैं। ऐसे में परिवहन का किराया भी बढ़ा दिया गया है जिसका बोझ केवल आम जनता और गरीब मजदूरों पर आता है। ऐसे में बढ़ती महंगाई कें चलते ये समस्याएं काफी जटिल है।

तेल की कीमत बढ़ने के मुख्य कारण

भारत में तेल की बढ़ती कीमत का मुख्य कारण ये है कि भारत में तेल मुख्य जहां से निर्यात होता है वहीं पर इसका दाम बढ़ाया गया है। जिसके चलते केंद्र सरकार को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसके चलते हमारी जीडीपी (GDP) में भी गिरावट आती है। आइए विस्तार पूर्वक आपको समझाते है।

आर्य की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चे तेल का नाम $10 प्रति बैरल बढ़ जाता है तो भारत को करीब 13 बिलियन डॉलर का घाटा होता है जिससे यह साफ पता चलता है कि हमारी अर्थव्यवस्था में तेल की बढ़ती कीमत कहीं ना कहीं प्रभावित करती है अपितु कहीं ज्यादा प्रभावित करती है।

कोरोनावायरस विकराल महामारी के बाद कुछ देशों ने तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने द्वारा निर्यात किए जाने वाले तेल के दामों को अपने तरीके से बढ़ाना शुरू कर दिया। अब तेल की डिमांड तो बढ़नी ही थी परन्तु सप्लाई एकदम कम हो गई अब इससे एक ही निष्कर्ष निकलता है कि दुनिया भर में तेलों के दाम आसमान छूने लगे।

बढ़ती कीमत के कारण जनवरी 2021 से कच्चे तेलों की कीमत 54.8 डॉलर प्रति बैरल हो गई है जो कि बहुत ही ज्यादा महंगा है और इसका सीधा असर भारत की आम जनता और गरीब मजदूरों पर ही पड़ा था। सिर्फ इतना ही नहीं अब केंद्र सरकार तेल को खरीदकर उसमें अपने टेक्स को जोड़ती है। उसके पश्चात ही राज्यों को सप्लाई किया जाता है। उसके बाद राज्य सरकार उसमे अपना टैक्स जोड़ती है। जिसके चलते कीमत और भी ज्यादा आकाश छू लेती है। केंद्र सरकार के द्वारा दिए गए बेस्ट प्राइस पर 25 से 30 फीसदी अतिरिक्त टैक्स लगाकर तेल विक्रेता को मुहैया करवाती है। जिससे कीमतें बढ़ जाती है।

तेल की बढ़ती कीमत का प्रभाव

तेल की बढ़ती कीमत के चलते आम जनता पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। क्यूंकि भारत विश्व का तीसरा तेल आयातक देश है और हमारे यहां सबसे अधिक तेल सऊदी अरब और इराक से आयात किया जाता है हमारे भारत में तेल की खपत इतनी ज्यादा है इसीलिए विदेशी मुद्रा भंडार का अतिरिक्त भार झेलना पड़ता है।

भारत 100 बिलियन डॉलर केवल अपने पेट्रोलियम पर खर्च करता है और भारत में कच्चे तेल का दाम प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से देश की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। पिछले कुछ सालों से पेट्रोलियम और कच्चे तेल के दाम काफी तेज़ी से बढ़े है जिसका प्रभाव आम जानता पर ही पड़ा है साथ ही साथ भारत की GDP पर भी पड़ा है।

तेल की कीमत को कम करने के महत्वपूर्ण उपाय

तेल की कीमतें इस कदर बढ़ गई है कि लोग खर्च करने में कतराते हैं ऐसे में तेलों के दाम कम करना बेहद जरूरी हो गया है। नीचे दिए गए उपयुक्त बिंदुओं में जानते हैं कि तेल के दाम को किस कदर कम किया जा सकता है।

• तेल की कीमतों को कम करने के लिए सबसे पहली चीज तो यह है कि हमें तेल पर निर्भरता कम कर देनी चाहिए। आज कल बैटरी वाले रिक्शों का चलन बढ़ रहा है जिसमे तेल की जरूरत ही नहीं है तो ऐसे में सरकार को इसपर जोर डालना चाहिए और इसका प्रचार प्रसार करवाना चाहिए।

• हालांकि केंद्र सरकार ने इस महीने से निम्न वर्ग के लोगों को कंट्रोल पर गेहूं चावल के साथ साथ तेल भी प्रदान किया है यह उपाय सराहनीय है।

• इसके साथ ही साथ केंद्र सरकार पेट्रोलियम पदार्थ पर जीएसटी का विकल्प चुन सकती है।

• अगर तेल को जीएसटी के अंदर लाया जाए तो उस पर लगाए जाने वाले टैक्स कोई निश्चित करना होगा और सरकार को एक प्रोसेस तैयार करना चाहिए जिसके तहत तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखा जा सके।

अंतिम शब्द (तेल के बढ़ते दामों पर निबंध)

आज के इस लेख में हमने तेल के बढ़ते दामों पर निबंध (Rising Oil Rate Hindi Essay) लिखा है। हम उम्मीद करते है आपको हमारे द्वारा लिखा गया लेख पसंद आया होगा। यदि पसंद आया हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद।

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