प्रदूषण की समस्या पर निबंध | pradushan ki samasya par nibandh (Updated) 2021

Pradushan ki samasya इन दिनों बढ़ गई है और वातावरण दूषित ही रहा है अगर आप प्रदूषण की समस्या पर निबंध 200 शब्दों में लिखना चाहते हैं। तो हमारे pradushan ki samasya par essay से सहायता ले सकतें हैं।

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दोस्तों, आज हमारी प्रकृति और वातावरण लगातार पूरी तरीके से प्रदूषित होता जा रहा है। प्रदूषण की समस्या देश में लगातार बढ़ती जा रही है। आप अपने आस पास कहीं पर भी देखें प्रदूषण अपना लगातार पांव फैलाता जा रहा है और लोगों के जीवन में अपना दुष्प्रभाव छोड़ता जा रहा है।

दोस्तों प्रदूषण अलग-अलग रूपों में प्रकृति रुपी संपदा को नष्ट कर रहा है। दिन पर दिन हमारा देश प्रदूषण के गिरफ्त में होता चला जा रहा है जिसके कारण हमारे देश के नागरिकों के स्वास्थ्य पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

तो दोस्तों, आज हम आपके सामने “प्रदूषण की समस्या पर निबंध” पेश करने जा रहे हैं जो कि देश के किसी भी नागरिक को जानना बहुत ही ज्यादा जरुरी है। और यह pradushan ki samasya par nibandh, CLASS 5,6,7,8,9,10,11,12 और competitive exams जैसे कि SSC,UPSC,UPSSSC के लिए भी बहुत ही उपयोगी साबित होगा।

हमारा ”पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर निबंध” (pradushan ki samasya par nibandh) आर्टिकल आपके लिए एसे कंपटीशन में भी अत्यंत सहायक सिद्ध होगा इसकी मदद से आपको प्रदूषण पर पूरी जानकारी प्राप्त होगी।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध 200 शब्द में

प्रदूषण का अर्थ (pradushan ka arth):-

प्रदूषण का अर्थ है दोषों से युक्त, खराब, ऊर्जा का नष्ट होना। यदि किसी भी शब्द के साथ प्रदूषण लग जाता है तो इसका अर्थ होता है कि उस पदार्थ या वस्तु का शक्तिहीन होना एवं नष्ट होना। प्रदूषण शब्द नकारात्मक कहलाता है एवं सकारात्मक व शक्तिपूर्ण चीजों के विलोम को दर्शाता है।

प्रदूषण की समस्या भूमिका (pradushan ki samasya bhumika):-

प्रदूषण की समस्या आज अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। pradushan ki samasya आज केवल प्रकृति को ही नहीं साथ ही साथ मनुष्य के दैनिक जीवन और उसके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव छोड़ रही है। जिसके कारण से प्रतिदिन मौतों की संख्या में बढ़ोतरी होती चली जा रही है।

pradushan ki samasya हम नागरिकों के कार्यप्रणाली की ही देन है जो कि आज हमारे सामने एक अभिशाप के तौर पर आ चुकी है। अब हम लोगों को भी पता चल गया है कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है।

प्रदूषण की समस्या का निवारण:-

जिस प्रकार pradushan ki samasya दिन पर दिन रुकने का नाम नहीं ले रही है इस तरह से हमारे लिए बहुत जरूरी है की हम इसका निवारण करें।

1- खूब पेड़ लगाएं। प्रतिदिन एक पेड़ लगाने का संकल्प करें।

2- पॉलीथिन का इस्तेमाल पर रोक लगाएं। सामान को लाने ले जाने के लिए प्राकृतिक एवं पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं को उपयोग में लाएं।

3- रीसाइक्लिंग (Recycling) को प्रमोट करें। प्लास्टिक के समान आदि प्रदूषण में अहम किरदार निभाते हैं तो इसको रोकने के लिए हम प्लास्टिक के समान बोतल खिलौने आदि को रीसाइक्लिंग करके उपयोग में ला सकते हैं और अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं।

निष्कर्ष:-

प्रदूषण हमारे आपके किए गए कार्यों का ही परिणाम स्वरूप है तो इसके लिए किसी और को दोष देना व्यर्थ है। प्रदूषण को रोकने के लिए हमें और आपको मिलकर ही अपने कार्य प्रणाली में बदलाव लाना होगा और संकल्प लेना होगा कि हम इस pradushan ki samasya से छुटकारा पाकर ही रहेंगे।

प्रस्तावना सहित प्रदूषण की समस्या और निवारण पर निबंध (300-400 शब्दों में):-

कई लोगों का लगातार कॉमेंट आ रहा थे- pradushan ki samasya par nibandh, दीजिए। इसलिए हम लेकर आए हैं, प्रदूषण की समस्या और निवारण पर निबंध। आप इसे ‘pradushan ki samasya par nibandh’ भी कह सकते हैं। तो आइए जानते हैं।

प्रस्तावना (Introduction):-

प्रदूषण हमारे लिए एक ऐसे अभिशाप के रूप में उभरता जा रहा है जिससे की सरलता से निदान पाना नामुमकिन सा प्रतीत होता है। प्रदूषण के कारण हमारे प्रकृति एवं इसके अमूल्य धरोहर को बहुत ही ज्यादा क्षति या हानि पहुंच रही है।

हम मानव अपने देश की भलाई को अनदेखा करते हुए बेझिझक अमानवीय कार्य करते हैं और अंत में pradushan ki samasya के घेरे में आ जाते हैं। 

प्रदूषण की समस्या पर निबंध
प्रदूषण की समस्या पर निबंध

प्रदूषण से पीड़ित हम मनुष्य के अलावा जानवर भी हैं जानवरों के जीवन पर भी प्रदूषण का गहरा प्रभाव हम सभी लोगों को देखने को मिल रहा है परंतु फिर भी हम प्रदूषण की समस्या को गहराई से नहीं लेते हैं। ना जाने क्यों?

प्रदूषण के प्रकार (pradushan ke prakar):-

विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रदूषण को कई भागों में बांट दिया गया है। तो हम आपको आगे प्रदूषण के प्रकार के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

  • वायु प्रदूषण
  • मृदा प्रदूषण
  • जल प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण
  • प्रकाश प्रदूषण
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण
  1. वायु प्रदूषण:- वायु में बढ़ते अपशिष्ट पदार्थ वायु प्रदूषण को जन्म देते हैं। वायु प्रदूषण अपने आप में ही सर्व शक्तिशाली और सभी को नष्ट कर देने वाला है। वायु प्रदूषण के कारण आज हम सभी को एवं जानवरों तक को सांस संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।                         पूरा पढ़े- वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में
  2. मृदा प्रदूषण:- मृदा का मतलब मिट्टी होता है। मिट्टियों का उपजाउपन में वृद्धि करने के लिए आज मनुष्य गलत तरीके से कीटनाशक का प्रयोग करते हैं जिसके कारण हमारी प्राकृतिक धरोहर मृदा बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है और मृदा प्रदूषण को जन्म देती है।                 पूरा पढ़ेमृदा प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 
  3. जल प्रदूषण:- नदियों, तालाब में कूड़ा फेंकना, गंदगी फैलाना अपशिष्ट पदार्थों का फैसला जल प्रदूषण को जन्म देता है।                                पूरा पढ़े- जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 
  4. ध्वनि प्रदूषण:- मॉडर्न गाड़ियों के हॉर्न, घर में रखे लाउडस्पीकर, रास्ते पर चलते हुए अमानवीय तरीके से शोर शराबा करना ध्वनि प्रदूषण का निर्माण करता है। ध्वनि प्रदूषण हमारी सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक है।    पूरा पढ़ें- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध हिंदी में
  5. प्रकाश प्रदूषण:- किसी कार्यक्रम में जरुरत से ज्यादा लाइट से सजावट अथवा एक कमरे में एक से अधिक बल्बों का होना प्रकाश प्रदूषण को प्रकाश प्रदूषण को जन्म देता है।
  6. रेडियोधर्मी प्रदूषण:- रेडियो एक्टिव तरंगों (जैसे कि मोबाइल से उत्पन्न रेडियोधर्मी तरंगे) से रेडियोधर्मी प्रदूषण उत्पन्न होता है।

प्रदूषण के कारण (pradushan ke karan):-

आइए जानते हैं कि, प्रदूषण के पीछे छुपे मुख्य कारण क्या हैं?

  • उचित की शिक्षा का अभाव।
  • व्यक्ति की अविकसित मानसिकता।
  • इंडस्ट्रीज के मल व कचड़ो में वृद्धि।
  • गैर बायोडिग्रेडेबल वस्तुओं के प्रयोग में विधि।
  • लगातार पेड़ों की कटाई।
  • व्यक्तिगत लापरवाही।
  • कीटनाशक के प्रयोग में विस्तार।

प्रदूषण की समस्या का निवारण (pradushan ki samasya ka nivaran):-

प्रदूषण एक गंभीर समस्या’ का आज हर तरफ बोलबाला है। इसका निवारण हम सबको ही निकालना है-

  • हम सबको हरित क्रांति पर जोर देना होगा।
  • पेड़ लगाने का संकल्प भी हमें करना होगा व इसे हमारी जिम्मेदारी के तौर पर लेना होगा।
  • घर एवं आसपास के जगह में साफ सफाई रखनी बहुत जरुरी है।
  • सरकार द्वारा प्रदूषण के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे।

उपसंहार:-

जीवन में समस्याएं तो सदैव रहती हैं ठीक उसी प्रकार देश में भी समस्या है, हम उन pradushan ki samasya पर किस नजरिए से कार्य करते हैं, यह मायने रखता है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (500-700 शब्दों में)

प्रस्तावना:-

हमारे प्रकृति में अपशिष्ट पदार्थों की अधिकता के कारण हमारा पर्यावरण, प्रदूषण के मामले में बढ़ता ही चला जा रहा है। पर्यावरण में प्रदूषित गैसे जैसे CO2, SO2, CH4, NO2 आदि लगातार पर्यावरण की हवा में मिलकर उसे प्रदूषित कर रही है।

हवा में प्रदूषण के कारण हर मानव के जीवन में बहुत बुरे प्रभाव पड़ रहे हैं एवं प्रदूषण उनके स्वास्थ्य के लिए समस्या बनता जा रहा है। अब हमारे लिए प्रदूषण के प्रकार (types of pollution) को रोकना एक जिम्मेदारी के समान बन गया है इसे हमें किसी भी कीमत में रोकना ही होगा।

प्रदूषण के प्रमुख तत्व:-

Photochemical oxidant (फोटोकैमिकल स्मॉग, Ozone, Paroxytycil nitrate, Nitrogen oxide,  Coordinate compounds from industries (एसिटिक एसिड, बेंजीन, ईथर), Radioactive Elements (रेडियम, थियम, यूरेनियम), कुछ अपशिष्ट पदार्थ (राख, कचरा,प्लास्टिक) प्रदूषण के पीछे के कारण हैं।

दुनिया भर के अधिकांश प्रदूषित शहर:-

हमारे विश्व के कई स्थानों में प्रदूषण को रोकने में कामयाबी पा ली है वह प्रदूषण की गिरफ्त से निकलने में कामयाब हो चुके हैं परंतु इसके साथ-साथ अन्य क्षेत्र ऐसे भी हैं जो अभी भी प्रदूषण की चपेट में है। दुनिया भर के अधिकांश प्रदूषित जगहों में कानपुर, दिल्ली, काशी, पटना, पेशावर, कराची, हेज़, चेरनोबिल, बामेंडा, बीजिंग और मॉस्को शामिल हैं।

यह शहर भारी प्रदूषण के मामले में उच्च पायदान पर जाने जाते हैं। यहां की सरकारी व्यवस्थाओं की लापरवाही के कारण यहां पर लगातार प्रदूषण के मामले बढ़ते ही चले जा रहे हैं।

शहरी स्थानों में वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण के मामले सबसे ज्यादा होते हैं तो इन प्रदूषण की रोकथाम के लिए आवश्यक है कि, सरकार द्वारा कड़े नियमों का निर्माण किया जाए और जनता द्वारा उन नियमों का सख्त तौर पर पालन भी किया जाए।

शहरों में प्रदूषण:-

शहरी परिवहन के बढ़ते उपयोग के कारण शहरों में गांवों की तुलना में प्रदूषण की समस्या बहुत ही ज्यादा है। शहर में औद्योगिकरण के बढ़ते प्रसार के कारण भी शहर प्रदूषण के रोकथाम में असफल हो चुके हैं। प्रदूषण की समस्या आज आम लोगों की समस्या बन चुकी है।

कारखानों एवं उद्योगों से निकलने वाला धुआं शहर की स्वच्छ एवं शुद्ध हवा को लगातार प्रभावित कर रहा है और मनुष्य के जीवन के लिए काल बनता जा रहा है।

विकसित सीवेज प्रणाली के कारण लगातार कचरों एवं अपशिष्ट पदार्थों का निस्तारण नदियों में किया जाता है जो कि एक बड़े पैमाने पर जल प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है।

बढ़ते वाहनों के उपयोग, निकलने वाली जहरीली गैस आज के मनुष्य एवं जानवरों के जीवन के लिए जहर बनती जा रही हैं। लोग अपने स्वार्थ के लिए लगातार इन कारणों को अनदेखा कर रहे हैं जो कि बिल्कुल भी सही बात नहीं है।

गांवों में प्रदूषण:-

हालांकि गावों में प्रदूषण की समस्या शहरों की Pradushan ki samasya की अपेक्षा में कम व संतुलित है परंतु समय की मांग के अनुसार जैसे जैसे गांवों में शहरीकरण पर कार्य चल रहा है और लगातार विकसित हो रहा है वैसे-वैसे गांव की पर्यावरण में सम्मिलित हवा प्रदूषित हो रही है।

लगातार बढ़ते उर्वरक व कीटनाशक का प्रयोग मृदा प्रदूषण को जन्म दे रहा है और उसके उपजाऊपन को अत्यंत हानि पहुंचा रहा है।

उचित पेय व्यवस्थाओं की वजह से गांव में हमें जल प्रदूषण के मामलों में वृद्धि दिखाई पड़ती है। यह समस्या उचित व्यवस्था के मुहैया कराने पर ही सही हो सकेगी।

प्रदूषण के कारण:-

जैसा कि हम और हमारी प्रकृति एक दूसरे के पूरक है हम जिस प्रकार का input हमारी प्रकृति को देते हैं, हमारी प्रकृति बदले में हमें उसी तरह का output देती है। और इसी कारण से प्रदूषण की समस्या (pradushan ki samasya) लगातार बढ़ती चली जा रही है।

मानव का स्वार्थ:-

आज का मानव स्वार्थी होता चला जा रहा है। उसे अपने स्वार्थ के आगे कुछ भी दिखाई नहीं देता फिर चाहे वह प्रकृति हो या स्वदेश। जहां मानव का कार्य सिद्ध हो वह वही रिश्ते बनाता है और निभाने में विश्वास रखता है।

इस संदर्भ में मानव ऐसे कुटिल कार्य कर देता है जिसका परिणाम अत्यंत भयावह होता है। किसी भी चीज के प्रदूषित होने के बाद उसका प्रभाव बहुत ही बुरा पड़ता है।

लगातार वन संपदा का हनन:-

देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए लगातार वन संपदा को हानि पहुंचाई जा रही है।

आप जहां कहीं भी नजर उठा कर देखें आपको बड़ी बड़ी बिल्डिंग, इंडस्ट्रीज बनी दिखाई देंगी।

जहां कुछ समय पहले हरे भरे पेड़ पौधे, वन संपदा हुआ करते थे आज वहां केवल बिल्डिंग और इंसान ही नजर आते हैं।

कितनी अजीब बात है कि हमें ऑक्सीजन देने वाले पेड़ का ही सर्वस्व नहीं हो तो भला हमारे जीवन का अस्तित्व क्या रह जाएगा?

इंडस्ट्रीज का मल या अपशिष्ट पदार्थ:-

देश में आज बढ़ते औद्योगिकरण भी प्रदूषण के बढ़ते प्रसार के पीछे जिम्मेदार है।

इंडस्ट्रीज से निकला हुआ मल, कचरा एवं अपशिष्ट पदार्थ आदि का सही से निस्तारण ना होने के कारण नदियां तालाब लगातार गंदे हो रहे हैं और जल प्रदूषण के प्रसार को बढ़ा रहे हैं।

उर्वरक व कीटनाशक का असीमित उपयोग:-

गावों में उर्वरक व कीटनाशक का असीमित उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है और मृदा प्रदूषण को जन्म दे रहा है। बढ़ते कीटनाशक के उपयोग से मिट्टी के उपजाऊपन की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है जिसके कारण हमारे अनाज की उपज व वन संपदा में लगातार गिरावट दिखाई दे रही है जो कि एक भयंकर भविष्य की ओर इशारा करती है।

औद्योगिकरण व परिवहन की बढ़ती मांग:-

आज हमारा देश एकदम तेजी से डिजिटल की ओर बढ़  रहा हैं। और मोदीजी ने डिजिटल इंडिया की शुरुआत कर दी है। 21वी सदी में औद्योगिकरण और परिवहन की बढ़ती मांग प्रदूषण का एक अलग ही संसार बसाने पर तुली हुई है।

बढ़ते औद्योगीकरण के कारण जल प्रदूषण लगातार विस्तृत रूप में उभर रहा है। उद्योगों से निकलते कचरे कूड़ा वशिष्ठ पदार्थ सीधे नदियों में फेंक दिए जाते हैं और नदियों की उचित सफाई भी नहीं की जाती है।

परिवहन क्षेत्र के विस्तार से वायु प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

प्रदूषण की रोकथाम / प्रदूषण को रोकने के उपाय:-

जिस तरह प्रदूषण का प्रसार लगातार बढ़ रहा है हमारे लिए बहुत ही जरूरी हो गया है कि हम प्रदूषण की रोकथाम के लिए उपयोग निकाले और उसे प्रयोग में लाएं तभी हमारा देश इस समस्या से बच सकता है।

प्रदूषण के रोकथाम के लिए कुछ प्रमुख उपाय –

  • नाली,कुओं,नदियों में गंदगी ना फेके। विसर्जन, आरती वगैरह नदियों में ना करें इसे सही स्थान पर निस्तारण करें। पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं करनी चाहिए।
  • जल संबंधी पाइप लाइन व कनेक्शन के साथ छेड़छाड़ बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
  • प्लास्टिक की जगह कागज को उपयोग में लाना चाहिए। रसायनिक खाद की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल दैनिक जीवन में करें। पॉलिएस्टर की जगह जूट व सूती कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। जल की महत्वता को समझें। जल का संरक्षण कर के हम जल प्रदूषण की समस्या को रोक सकते हैं।
  • वृक्षों की कटाई को रोकना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाना चाहिए। हरित क्रांति का प्रचार करना चाहिए। हमें ऑर्गेनिक खेती करने की ओर ध्यान देना चाहिए। प्रतिदिन एक वृक्ष लगाने का संकल्प लें। वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। तो इसे काटने की बेवकूफी बिल्कुल भी ना करें। वृक्षों से हमें शुद्ध हवा प्राप्त होती है जोकि वायु प्रदूषण की समस्या को रोकने में समर्थ है।
  • घर में टीवी, स्पीकर की आवाज को कम करके सुने। ईयरफोन/ हेडफोन का इस्तेमाल कम से कम करें। पटाखों का उपयोग न करें। पटाखे अकेले वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के पीछे का कारण है तो इसे बिल्कुल भी प्रयोग में ना लाएं। और ऐसा करके हम pradushan ki samasya समाप्त कर सकते हैं।
  • मृदा में उर्वरक व कीटनाशक का उपयोग कम से कम करें। ज्यादा खेती के लिए ज्यादा कीटनाशक का प्रयोग करना सही नहीं है इसलिए अपनी गलत अवधारणा को बदल लें।
  • वाहनों के अत्यधिक इस्तेमाल पर रोक लगाना चाहिए। यदि ज्यादा जरूरी ना हो तो साइकिल का प्रयोग करें या तो पैदल चलना prefer करें। इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी एवं हमारे पर्यावरण रूपी संपदा भी सशक्त व स्वच्छ होगी। और प्रदूषण की समस्या भी नहीं होगी।
  • सरकार द्वारा प्रदूषण रोकने को लेकर सख्त नियम बनाए जाएं एवं सभी नागरिकों द्वारा कठोरता से उनका पालन किया जाए तभी प्रदूषण को हम और आप मिलकर अपने देश और विश्व से दूर भगा सकते हैं अन्यथा यह प्रदूषण हमारी रग-रग में पुष्कर हमें आर्थिक व शारीरिक रूप से समाप्त कर देगा। और ऐसे ही प्रदूषण की समस्या (pradushan ki samasya) बढ़ती ही चली जाएगी।

प्रदूषण का पर्यावरण पर प्रभाव (pradushan ka paryavaran par prabhav):-

प्रदूषण के पर्यावरण पर प्रभाव बहुत ही भयावह है। पर्यावरण के शुद्ध हवा अब अशुद्ध हवा में परिवर्तित होती जा रही है। जहां भी देखो अशुद्ध हवा का ही संचालन हो रहा है। मनुष्य के लिए आज समाज में सांस लेना भी दूभर हो गया है। इसलिए ‘pradushan ki samasya’ बढ़ती चली जा रही है।

ग्लोबल वार्मिंग (global warming) भी आज के समय में चिंता का विषय बन चुका है। कुछ दिनों पहले ही प्रदूषण के कारण एक बच्ची की मौत की खबर सामने आई है इसे सुनकर ही आप सोच सकते हैं कि यह प्रदूषण किस हद तक हमारे लिए हानिकारक हो सकता है।

मनुष्य की असीमित लापरवाही आज उसी को इस स्थिति पर पहुंचा दे रही है कि वह अपनी जान बचाने के लिए इधर से उधर भाग रहा है परंतु उससे बचने का कोई साधन प्राप्त नहीं हो रहा है।

हमारे लिए बहुत ही ज्यादा जरुरी है की सरकार द्वारा प्रदूषण मुक्त भारत बनाने के लिए जो नियम व कानून बनाया जाएं उनका हम सख्ती से पालन करें और अपने दैनिक जीवन में भी प्रयास करें की इको फ्रेंडली प्रोडक्ट्स व वर्क को encourage करें।

इस प्रकार हम अपने शरीर की सफाई करते हैं उसी प्रकार हमें अपने आसपास की सफाई भी रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि, स्वच्छता में ही देवता निवास करते हैं। हमारे लिए अति आवश्यक है कि हम जिस प्रकार अपने शरीर का ध्यान रखते हैं उसी प्रकार अपनी पृथ्वी रूपी संपदा का भी ध्यान रखें। और अगर हम सब लोग ऐसा ही करने लगे तो ज्यादा समय नहीं लगेगा कि जब हमारे आसपास से pradushan ki samasya चली जायेगी।

निष्कर्ष:-

जिस प्रकार प्रकृति के संतुलन के लिए हमें प्रकृति के अनुरूप ही चलना होता है ठीक उसी प्रकार इस प्रकृति की रक्षा भी हमारे हाथ में ही है यदि हम इसकी रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाले समय में यह हमें हमारे कर्मों का फल अवश्य देगी।

इस बात का पता आप भूकंप ,बाढ़ ,सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से लगाया ही जा सकता है कि किस तरह से यह प्राकृतिक आपदाएं हमारे जीवन को क्षण भर में खत्म कर सकती है अतः हमारे लिए जरूरी है कि हम प्रकृति के साथ संतुलन बना कर अपने जीवन को सफल बनाएं और प्रदूषण की समस्या (pradushan ki samasya) ना होने दें। 

आखिरी शब्द

दोस्तों आपके लिए इस पोस्ट में हम लेकर आए थे- pradushan ki samasya par nibandh (प्रदूषण की समस्या पर निबंध), केवल हमारे देश मे ही नहीं अपितु पूरे विश्व भर में है। हमने अपने, प्रदूषण की समस्या पर निबंध हिंदी में, प्रदूषण Zest Money की समस्या और निवारण पर निबंध, में पूरी जानकारी देने का छोटा सा प्रयास किया है। तो दोस्तों हम आशा करते हैं की हमारे इस आर्टिकल प्रदूषण की समस्या पर निबंध Essay on pollution in hindi उपयोगी लगा होगा और आपको प्रदूषण की समस्या से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त हो चुकी होंगी।

आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट में अवश्य बताएं एवं “प्रदूषण की समस्या पर निबंध (pradushan ki samasya par nibandh)” आर्टिकल को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों एवं सगे संबंधियों में भी अवश्य शेयर करें ताकि यह उपयोगी जानकारी उन तक भी पहुंच पाये।

अब हम आइए अब Pradushan ki samasya par nibandh से सम्बंधित कुछ प्रश्नों के उत्तर जानते हैं।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर (FAQ):-

Q1- क्या इस प्रदूषण की समस्या पर निबंध को हम 400, 500 , 600 से लेकर 2000 शब्दों में लिख सकते हैं?

Ans- जी हां ये निबंध पूरे 2500 शब्दों का है आप जितने शब्दों में लिखना चाहें बेझिझक लिख सकते है।

Q2- प्रदूषण को रोकने का उपाय बताइए?

Ans- प्रदूषण को रोकने के बहुत से उपाय हो सकते हैं जैसे नदियों में कपड़े धोना बंद करना चाहिए, पूजा सामग्री को नदी में विसर्जित नहीं करना चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए, इत्यादि।

Q3- भारत में सर्वाधिक रेडियो dharmi pradushan कहां पाया जाता है

Ans- मुंबई

Q4- क्या हम प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 100 शब्दों में लिख सकते हैं?

Ans- जी हां ऊपर दिया गया प्रदूषण पर निबंध 2000 शब्दों में तो आप अपनी जरूरत के अनुसार उसे छोटा कर के लिख सकते हैं।

Q5- प्रदूषण की समस्या क्या है?

Ans- प्रदूषण की समस्या आज अपने चरम पर पहुंच चुकी है। प्रदूषण की समस्या आज केवल प्रकृति को ही नहीं साथ ही साथ मनुष्य के दैनिक जीवन,उसके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव छोड़ रही है जिसके कारण प्रतिदिन मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है।

Q6- प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखा जाता है

Ans- प्रदूषण पर निबंध आप प्रस्तावना से शुरू कर सकते हैं बीच में प्रदूषण के कारण, प्रदूषण का मानव जाति पर प्रभाव, प्रदूषण से बचने के उपाय इत्यादि बताकर प्रदूषण पर निबंध लिख सकते हैं।

तो दोस्तों हम आशा करते हैं की हमारे इस आर्टिकल प्रदूषण की समस्या पर निबंध Essay on pollution in hindi उपयोगी लगा होगा और आपको प्रदूषण की समस्या से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त हो चुकी होंगी।

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सधन्यवाद।

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