जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Jal Pradushan par nibandh in hindi

जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Jal pradushan par nibandh in hindi:-

प्रदूषण आज के समय में एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है। जिधर भी हमारी नजर पड़ती है उधर ही प्रदूषण पांव पसारे बैठा हुआ है। जल थल, प्रत्येक ओर प्रदूषण का बोलबाला है। आज प्रदूषण के कारण हम मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों व पशु पक्षियों के जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है इस प्रदूषण का कहीं अंत होते दिखाई नहीं पड़ रहा है।

आज हम इस आर्टिकल में जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में पढ़ेंगे जोकि class-5,6,7,8,9,10,11,12 के विद्यार्थियों के लिए सहायक सिद्ध होगा। Jal Pradushan par nibandh in hindi कंपीटेटिव परीक्षा (SSC,UPSC,UPSSSC एवं अन्य) की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी वरदान सिद्ध होगा।

Jal pradushan par nibandh in hindi
Jal pradushan par nibandh in hindi

प्रदूषण क्या है प्रस्तावना:-

किसी भी वस्तु एवं संसाधन की बर्बादी प्रदूषण कहलाती है। कोई बहुमूल्य संसाधन जिसका हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्व हो ऐसे संसाधनों को क्षमताहीन करना प्रदूषण कहलाता है। आज हमारे प्रकृति के बहुमूल्य संसाधन लगातार शक्तिहीन होते जा रहे हैं और प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।

प्रदूषण पूरे विश्व के लिए एक अभिशाप की तरह हो गया है जिससे पूरी तरीके से उबर पाना लोहे के चने चबाने के समान है।

प्रदूषण के प्रकार:-

प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं- जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, पर्यावरण प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण, रेडियोएक्टिव प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, थर्मल प्रदूषण इत्यादि।
प्रदूषण हर तरह का हानिकारक होता है। यह पेड़ पौधों को भी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है एवं उनके अस्तित्व का नष्ट कर देता है।

पेड़ पौधे हमारे जीवन के रक्षक हैं इनसे हमें ऑक्सीजन मिलता है जोकि जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण है तो इनके अस्तित्व को बचाना हमारी और आपकी जिम्मेदारी है।

जल प्रदूषण प्रस्तावना/परिभाषा:-

जल हमारे जीवन का अति महत्वपूर्ण संसाधन है। बिना जल के हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।हम इंसान बिना खाना खाए तो रह सकते हैं परंतु बिना जल के एक क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।

एक कहावत से तो हम सब वाकिफ हैं-
जल ही जीवन है।

वास्तव में यह एकदम सत्य है कि जल ही जीवन है हमारा जीवन जल से ही है जल की प्यास को कोई पेय पदार्थ कभी भी नहीं मिटा सकता है।

जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में
जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

जल के इतने कीमती व महत्वपूर्ण होने के बावजूद लोग जल को नष्ट करने में बिल्कुल भी नहीं हिचकते है। जल का मली,नष्ट व गंदा होना जल प्रदूषण कहलाता है।

मनुष्य हो चाहे पशु-पक्षी या चाहे पेड़-पौधे बिना जल के हर कोई अधूरा है। जल के बिना सब का जीवन अधूरा है। परंतु आज के समय में जल प्रदूषण बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है।

जल प्रदूषण पर 10 वाक्य|जल प्रदूषण पर 10 line निबंध:-

1-  जल हमारी पृथ्वी का सर्वश्रेष्ठ संसाधन है। इसका संरक्षण करना हमारी आपकी ही जिम्मेदारी हैं।
2- जल ही जीवन है। जल बिना मनुष्य, पेड़ पौधे, पशु पक्षी हर कोई अधूरा हैं।
3- जल प्रदूषण के विस्तार के पीछे औद्योगिकरण का बढ़ना जिम्मेदार हैं।
4- जल प्रदूषण के पीछे मनुष्य का लापरवाही करना बड़ा कारण है।
5- जल की अंधाधुध बर्बादी जल प्रदूषण को बढ़ावा देने के पीछे का कारण हैं।
6- नदी में कचरा फेकना नदी प्रदूषण को बढ़ावा देता है।
7- गंगा में स्नान करना , कपड़े धुलना , फूल चढ़ाना भी जल प्रदूषण के अंतरगत आता है।
8- सरकार ने जल प्रदूषण को रोकने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है।
9- जल को बचाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा।
10- जल भोजन से अधिक महत्वपूर्ण हैं इसलिए इसका संरक्षण अवश्य करे व दूसरो को भी जागरूक करे।

जल प्रदूषण पर 10 वाक्य
जल प्रदूषण पर 10 वाक्य

जल प्रदूषण कैसे होता है?/पानी दूषित कैसे होता है?

किसी अपशिष्ट पदार्थ का जल में मिलकर उसे दूषित करने से जल प्रदूषण उत्पन्न होता है। अपशिष्ट पदार्थ जल में मिलकर उसे पूरी तरीके से दूषित कर देते हैं इस तरह से स्वच्छ जल अपनी क्षमता को खो देता है एवं प्रदूषित हो जाता है।

हमारे सामने जल के अनेक स्रोत मौजूद है जल के अनेक अनेक स्रोतों में जल प्रदूषण की घटना अलग-अलग है।

जल प्रदूषण के कारण/ Jal pradushan ke kaaran:-

जल प्रदूषण के मुख्य कारण है:-

1- उद्योगों से निष्कासित कचरा:- 

जिस तरह हम देख रहे हैं कि हमारे देश में औद्योगिकरण का कितना तेजी से विस्तार हो रहा है जो कि हमारे देश को एक विकसित देश बनाने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

जहां एक ओर उद्योगों से हमारी अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर उद्योगों से निष्कासित कचरे का सही निस्तारण ना होने पर उसे नदियों में फेक दिया जाता है जिसकी वजह से नदियों का अधिकांश पानी दूषित हो जाता है।

यही दूषित पानी जब मनुष्य व पशु-पक्षी पीते हैं तो मनुष्य कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाता है और पशु-पक्षी मर जाते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जल प्रदूषण में उद्योगों का कितना ज्यादा योगदान है।

2- खराब मानसिकता:- 

आज मनुष्य की सही मानसिकता ना होने के कारण हर क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। जल हो चाहे थल मनुष्य में किसी भी चीज को स्वच्छ नहीं छोड़ा है।

मनुष्य की खराब मानसिकता के चलते वह सारे काम उल्टे करना ही पसंद करता है। सही चीज है उसे नहीं भाती। कुछ नया करने की चाह में वह हमेशा कुछ न कुछ गड़बड़ करता रहता है।

3- अशिक्षित समाज:- 

मनुष्य के अशिक्षित होने के कारण वह सही और गलत में फर्क भी समझ पाता। वह गंगा में स्नान करने के पश्चात उसी में अपने गंदे कपड़ों को धुलता है पूजा पाठ करके उसी में फूल व अगरबत्ती बहा देता है सोचता है इससे देवता प्रसन्न होंगी परंतु उसे यह नहीं मालूम कि उसने एक स्वच्छ जल को अस्वच्छ कर दिया जिससे कि जल प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है।

4- जल को व्यर्थ करना:- 

मनुष्य जल को जितना स्माल नहीं करता उससे ज्यादा व्यर्थ कर देता है कपड़े धोने में नहाने में लागत की तुलना में अत्यधिक पानी खर्च करता है और कहता है कि केवल हमारे बचाने से कुछ नहीं होगा जो कि सरासर गलत है यदि एक एक व्यक्ति जल का संरक्षण करना शुरू कर दें तो जल के लिए युद्ध कदापि नहीं होगा।

5- रासायनिक प्रयोगशाला:-

आज के समय में प्रयोगशालाओं में रसायनों के नए-नए एवं भिन्न-भिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं और इस तरह के उत्पादों को बनाया जाता है जिसमें अलग-अलग रसायनों का इस्तेमाल किया गया हो।

ऐसे रसायनों को बनाने में जो रसायन अपशिष्ट के रूप में निकलते हैं उन्हें भी नदियों में बहाकर जल प्रदूषण फैलाया जाता है ऐसे रसायन किसी भी व्यक्ति के सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक है।

6-धार्मिक प्रचलन- 

हिंदू धर्म में पूजा में शामिल की गई सामग्री, मृत्यु के बाद अस्थि व शव को गंगा में बहा देने का प्रचलन प्राचीन से है जोकि जल प्रदूषण का एक कारण बनता है। यह प्रचलित विधाएं जल प्रदूषण को आमंत्रित करती है।

7- अम्ल वर्षा- 

अम्ल वर्षा रसायनों से मिले हुए जल की वर्षा होती है जिस भी स्थान पर अम्ल वर्षा होती है उस जगह में प्रयुक्त जल में अम्ल (Acid) मिलकर उसे रसायन से युक्त करता है और जल में अम्ल का मिलना जल प्रदूषण की ओर इशारा करता है।

जल प्रदूषण के प्रभाव/जल प्रदूषण से क्या हानि है? :-

जल प्रदूषण के प्रभाव बहुत ही गंभीर एवं भयावह हैं। जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव है –

1- जल प्रदूषण के कारण विश्व में लगातार रोज लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं आज के समय में ऐसा एक मनुष्य ढूंढना बहुत मुश्किल है जो कि पूर्णता स्वस्थ हो। प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी तरह की बीमारियां है। किसी को डायबिटीज तो किसी को सांस की दिक्कत किसी को मलेरिया तो किसी को पेट में इन्फेक्शन प्रत्येक तरह की बीमारियों के पीछे दूषित जल होता है।

2- देश में बढ़ते प्रदूषण के कारण हमारे देश की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है और हम मनुष्य चुपचाप इस घटना को देख रहे हैं यदि ऐसा ही चलता रहा तो इस पृथ्वी पर केवल प्रदूषण प्रदूषण रह जाएगा, मनुष्य का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

3- प्रदूषण के होते विस्तार से लगातार देश के मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। आज व्यक्ति बिना मास्क के निकलना ही बंद कर दिया है। बड़े शहरों जैसे कि मुंबई,दिल्ली,कोलकाता जैसे इलाकों में तो आपको सामने-सामने प्रदूषण का आभास होगा। इस हद तक प्रदूषण बढ़ चुका है कि इसे किस प्रकार रोकें किसी को सोच ही नहीं रहा है।

4- बढ़ते प्रदूषण के कारण हमारी आंखों को भी बहुत खतरा पहुंच रहा है आज छोटे-छोटे बच्चे तक को चश्मा लग चुका है। इसके पीछे प्रत्येक पदार्थ में प्रदूषण होना ही है। भीषण प्रदूषण जैसे शहरों में तो आंखों से पानी बहना, लाल होना, दर्द करना जैसे समस्याएं आज के समय में आम हो गई है।

5- जल प्रदूषण के कारण आज स्वच्छ जल की कमी हो गई है। गरीब व नीची जाति के लोगों को पानी के लिए मेलों कोसों दूर चलकर पानी लाना पड़ता है तब जाकर उनके दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त हो पाता है जोकि अत्यंत दयनीय है।

6- जल प्रदूषण से पानी दूषित होने के कारण पशु पक्षी मरते जा रहे हैं जिससे कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है यदि ऐसा ही चलता रहा तो सृष्टि का अंत होने से कोई भी नहीं रोक सकता।

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय/ Jal pradushan ke upay:-

जल प्रदूषण को रोकने के मुख्य उपाय हैं-

1-कारखानों का उद्योगों से निकले हुए अपशिष्ट बच्चे के निस्तारण के लिए सही विधि अपनाने चाहिए इन्हें नालों व नदियों में निष्कासित करने पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

2- किसानों द्वारा खेतों में उर्वरकों व रासायनिक पदार्थों के उपयोग में कमी करनी चाहिए जल की जितनी जरूरत हो उतने ही जल का प्रयोग हो तो इस प्रकार हम जल प्रदूषण को काफी हद तक रोक सकते हैं।

3- जल के महत्व को हम सभी को समझना चाहिए और अपने आसपास के लोगों को भी जल के प्रति जागरूकता फैल आनी चाहिए ताकि सभी को जल के महत्व के बारे में पता चले।

4- नदियों एवं अन्य जल स्रोतों में कचरा कूड़ा व कोई भी अपशिष्ट पदार्थ फेंकना गैरघोषित करना चाहिए। किसी भी प्रकार के कचरे को नदियों एवं जल स्रोतों में फेंकने पर एक दंड निश्चित किया जाना चाहिए जिससे कि लोग ऐसे कार्य करने में झिझके।

5- कार्बनिक पदार्थ का निष्पादन करने से पहले उनका ऑक्सीकरण करना जल प्रदूषण को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

6- पानी में प्रयुक्त जीवाणुओं और कीटाणुओं को मारने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि उसमें जीवाणु व कीटाणु नष्ट हो जाए और हमारा पानी स्वच्छ हो जाए।

7- लगातार समुद्रों में किए जा रहे परमाणु परीक्षणों पर कानूनी तौर पर रोक लगाई जानी चाहिए।

जल प्रदूषण पर टिप्पणी:-

जिस प्रकार हम अपने प्रत्येक कार्य में जल का इस्तेमाल करते हैं फिर चाहे वह खाना बनाना हो, कपड़े धूलना हो, बर्तन धोना हो, स्नान करना हो या चाहे पीना हो प्रत्येक कार्य में जल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तो हम क्यों जल को संरक्षित करने में पीछे रहे?
जल हमारे जीवन में सबसे ज्यादा महत्व रखता है इसलिए जल को बचाना व संग्रहित करना अत्यंत जरूरी है क्योंकि यदि पृथ्वी पर प्रयुक्त संपूर्ण जल प्रदूषित हो गया तो हमारे जीवन का नाश होना भी तय है।

जल प्रदूषण पर प्रमुख आंकड़े:-

केन्द्रिय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सबसे पवित्र नदी गंगा ही सबसे प्रदूषित नदी है। एक प्रमुख रिसर्च से हमें यह मालूम लगा कि गंगा नदी में प्रतिदिन लगभग 1,400 मिलियन लीटर सीवेज़ और 200 मिलियन लीटर औद्योगिक कचरा ज़ेस्ट मनी लगातार छोड़ा जा रहा है जिसकी वजह से हमारी सबसे पवित्र नदी गंगा सबसे प्रदूषित नदी होती जा रही है।

1984 में गंगा नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए गंगा एक्शन प्लान को शुरू करने के लिए भारत सरकार ने एक कमेटी गठित की जिसका नाम केंद्रीय गंगा प्राधिकरण बोर्ड था जिसके तहत हरिद्वार से लेकर हुबली तक की 120 फैक्ट्रियों को ब्लैक लिस्ट किया गया जिससे कि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलने की आशंका थी।

उपसंहार:- 

यह हमारी पृथ्वी है हमने इस पर जन्म लिया है तो इसे बचाना और इसका ख्याल रखना भी हमारा परम कर्तव्य है। इसलिए यहां पर प्रयुक्त प्रत्येक तरह के प्रदूषण  का रोकथाम करना हमारा और आपका ही कर्तव्य है इसलिए जागरूक रहिए और दूसरों को भी जागरुक करिए।

तो दोस्तों आज हमने जल प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (jal pradushan par nibandh in hindi) पढ़ा। हम आशा करते हैं कि आपको जल प्रदूषण पर निबंध ( jal pradushan par nibandh) अच्छा लगा होगा। यदि जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों का सगे संबंधियों के साथ भी अवश्य शेयर करें ताकि उन्हें भी यह जानकारी मिले। हमें कमेंट सेक्शन में अवश्य बताएं कि आपको यह आर्टिकल कैसा लगा।

प्रदूषण से संबंधित आप हमारी अन्य पोस्ट भी पढ़ सकते हैं। जिसके नाम निम्न प्रकार में है

1पर्यावरण प्रदूषण और उसके प्रभाव पर निबंध- Effect of Environmental Pollution in hindi

2- प्रदूषण की समस्या पर निबंध।

3- वायु प्रदूषण पर निबंध।

4- ध्वनि प्रदूषण पर निबंध।

5- सड़क स्वच्छता पर निबंध

6- पृथ्वी दिवस पर निबंध