ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध | essay on global warming in hindi (2021)

हेल्लो दोस्तो क्या आप ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध लिखना चाहते हैं। यदि हां तो आप हमारे essay on global warming in hindi पोस्ट से पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हेल्लो दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) पर पूरी जानकारी, जैसे कि: ग्लोबल वार्मिंग से आप क्या समझते हैं?, ग्लोबल वार्मिंग क्या है?, ग्लोबल वार्मिंग का दुष्प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग के लाभ और हानि, ग्लोबल वार्मिंग और भारत, इन सभी टॉपिक्स के अलावा हम और भी ग्लोबल वार्मिंग से सम्बन्धित टॉपिक्स पर जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए जानते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध
ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

आज के इस दौर में पर्यावरण प्रदूषण कितनी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है खासकर अपने देश भारत में भारत के कई शहर विश्व प्रदूषण की लिस्ट में टॉप पर हैं। प्रदूषण बढ़ने का कारण ही है ग्लोबल वार्मिंग।

तो आइए ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध में हम जानते हैं, ग्लोबल वार्मिंग क्या है? ग्लोबल वार्मिंग (global warming) को हम हिंदी भाषा में भूमंडलीय ऊष्मीकरण कहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या मुख्य रूप से धरती में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से बढ़ती है।

प्रस्तावना एवं निष्कर्ष सहित ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

ग्लोबल वार्मिंग क्या है? (प्रस्तावना)

वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों जैसे: कॉर्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, आदि के बढ़ने के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में होने वाली वृध्दि को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग में पृथ्वी का तापमान बढ़ने के कारण जलवायु परिवर्तन हो जाता है। और इसके कारण पृथ्वी में समुद्र का जल स्तर और भी बढ़ जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग होने का कारण:-

दोस्तों ग्लोबल वार्मिंग औद्योगिक क्रांति के बाद से औसत वैश्विक तापमान में हुई बढ़ोतरी को दिखाता है। सन 1880 के बाद से औसत वैश्विक तापमान में लगभग एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। ग्लोबल वार्मिंग एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, अब वैज्ञानिकों को यह शक है कि 2035 तक औसत वैश्विक तापमान अतिरिक्त 0.3 से 0.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पता चला है कि 21वीं शताब्दी के अंत तक कई समुद्र के किनारे बसे शहरों के डूबने की आशंका है। तो आइए जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग होने का कारण, क्या हैं?

  • वाहनों से निकला धुआं
  • पेड़ों का लगातार कटाव
  • वनों को काटना
  • तेलों, प्राकृतिक गैसों आदि को जलाना
  • कोयले का जलना
  • वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों की बढ़ी हुई सांद्रता
  • फ्रीज, एयर कंडीशनर का बढ़ता प्रयोग
  • तेजी से बढ़ता औद्योगीकरण
  • कोयले से बनने वाली बिजली के कारण भी ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी हुई है।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय:-

दोस्तों हमने पहले जाना कि ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण, और अब हम इस पैराग्राफ में जानेंगे ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के उपाय तो आइए जानते हैं।

  • दोस्तों scientists का कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग को रोकना है तो सीएफसी गैसों का उत्सर्जन कम करना होगा।
  • वाहनों की संख्या को अब जितना हो सके उतना कम ही बढ़ने दें।
  • आने वाले समय में हमें वनों को काटने से रोकना होगा।
  • हम लोगों को कूलिंग मशीनों का उपयोग कम करना होगा।
  • औद्यौगिक इलाकों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं बहुत ही हानिकारक होता है तो हमें इसका कुछ न कुछ उपाय करना होगा।
  • हमें रीसाइक्लिंग के प्रकरण पर जोर देना होगा।
  • हमें कोयले से बनने वाली बिजली को कम से कम करना होगा और इसकी जगह हमें सौर ऊर्जा, पानी बिजली और पवन ऊर्जा आदि पर ध्यान देना होगा।

ग्लोबल वार्मिंग का भविष्य में असर:-

दोस्तों ग्लोबल वार्मिंग हम सभी लोगों के लिए बराबर मात्रा में हानिकारक है तो हम सब लोगों को एक जुट होकर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने का प्रयास करना होगा। ग्लोबल वार्मिंग का भविष्य में असर काफी भयावह है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2100 तक हमारी पृथ्वी का तापमान, इस समय के तापमान से 1.5 से 6 गुना तक बढ़ सकता है। जिसके कारण हो सकता है कि समुद्र के आस पास के इलाके पानी में डूब जाएं।

और इसी बीच आपको यह जानकारी और भी परेशानी में डाल सकती है कि अगर वर्तमान समय में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बिल्कुल कम कर दिया जाए तो भी तत्काल में तापमान रुकने की संभावना बिल्कुल नहीं है।

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन में सम्बंध:-

EESI (एनवायरमेंटल एंड एनर्जी स्टडीज इंस्टीट्यूट) की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का उपयोग ज्यादातर एक दूसरे के लिए किया जाता है। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के तापमान में औसत बढ़ोतरी के कारण जाना जाता है। वहीं जलवायु परिवर्तन आमतौर पर मौसम में हुए लगातार परिवर्तन या बदलाव के लिए जाना जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग का प्राकृतिक आपदाओं से सम्बंध:-

दोस्तों अब हम लोग जानते हैं कि; ग्लोबल वार्मिंग का प्राकृतिक आपदाओं से क्या सम्बन्ध है?

जैसा कि आप लोग जानते हैं कि पृथ्वी के तापमान में हुई बढ़ोतरी से तूफान, आग, बाढ़ आदि के खतरे की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

एक गर्म जलवायु होने के कारण वायुमंडल अधिक पानी इकट्ठा कर सकता है जिसके कारण और बारिश भी हो सकती है और बारिश के होने के पैटर्न में भी बदलाव हो सकता है।

इसके कारण अधिक तेज़ी तूफानी वर्षा होती है जिसके कारण किसानों की फसलों, आम जनमानस की संपत्ति और बुनियादी ढांचे को बहुत ही ज्यादा हानि पहुंचती है। और इसके कारण जनजीवन पर इसका भारी असर दिखाई देता है।

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारण समुद्री सतह का तापमान बढ़ जाता है और समुद्री तापमान के बढ़े होने के कारण तूफान का बनना आसान हो जाता है। जिससे भारी नुकसान होता है।

ग्लोबल वार्मिंग का समुद्री जलस्तर से सम्बंध:-

दोस्तों कई लोगों का अक्सर एक सवाल रहता है कि आखिरकार ग्लोबल वार्मिंग का समुद्री जलस्तर से सम्बंध क्या है? तो आइए जानते हैं।

दोस्तों ग्लोबल वार्मिंग होने से कई समुद्री जलस्तर कई प्रकार से बढ़ता है। तो आइए वो सभी तरीके जानते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारण सबसे पहले तो बर्फ की चादरें या ग्लेशियर पिघलने लगते हैं। पूरी दुनिया में ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियर बहुत ही तेजी से पिघल रहे हैं।

ग्लोबल वार्मिंग से दूसरी अन्य चीज यह है कि ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र के जल का तापमान बढ़ जाता है जिसके कारण से समुद्र के जल का आयतन बढ़ जाता है। जिसके कारण से बहुत ही तेजी से तूफानी वर्षा होती है और इस भयंकर तूफानी वर्षा के कारण भयंकर तबाही होती है।

ग्लोबल वार्मिंग गैस कौन सी हैं?:-

दोस्तों, विश्व मिटियोरॉलॉजिकल ऑर्गेनाइज़ेशन (WMO) की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा औद्योगिक युग की शुरुआत के बाद से सबसे ज़्यादा है। इन गैसों से ही ग्लोबल वार्मिंग होती है।

ग्लोबल वार्मिंग और भारत:-

दोस्तों, आने वाले समय में दक्षिणी भारत में और अधिक गंभीर बारिश की आशंका के साथ ही साथ, मौजूदा ग्लोबल वार्मिंग के रुझान से भारत में वार्षिक औसत वर्षा में वृद्धि होने की आशंका भी है। रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि 7,517 किलोमीटर समुद्र तट के साथ, भारत को समुद्रों के बढ़ते जल स्तर से भारी खतरों का सामना करना पड़ेगा।

ग्लोबल वार्मिंग का मानव जीवन पर प्रभाव:-

दोस्तों हम सब मानव जन इस पृथ्वी पर ही रहते हैं और यह ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने से पृथ्वी को नुकसान होगा। तो यह कहना गलत नहीं होगा कि इसमें रहने वाले प्राणियों पर इसका दुष्प्रभाव देखने को मिलेगा। तो ग्लोबल वार्मिंग का दुष्प्रभाव हमारे जीवन पर जरुर पड़ेगा।

ग्लोबल वार्मिंग से सम्बन्धित कुछ आंकड़े:-

दोस्तों, 2020 को संयुक्त भूमि और समुद्र की सतह के लिए 141 साल के रिकॉर्ड में दूसरे सबसे गर्म वर्ष के रूप में स्थान दिया गया है। क्योंकि भूमि क्षेत्र रिकॉर्ड पर सबसे गर्म थी। यूरोप और एशिया के कई हिस्से रिकॉर्ड तौर पर गर्म थे। जिनमें अधिकांश फ्रांस और उत्तरी पुर्तगाल और स्पेन, रूस और दक्षिणपूर्वी चीन, अधिकांश स्कैंडिनेवियाई प्रायद्वीप शामिल हैं।

अधिकांश अटलांटिक और हिंद महासागरों सहित, दुनिया का एक बड़ा हिस्सा औसत रुप में बहुत अधिक गर्म पाया गया था। गर्मी अंटार्कटिक तक पहुंच गई थी। जहां अंटार्कटिक प्रायद्वीप की नोक पर एस्पेरांज़ा बेस का स्टेशन, 6 फरवरी, 2020 को 65.1 डिग्री फ़ारेनहाइट (18.4 डिग्री सेल्सियस) का एक नया रिकॉर्ड उच्च तापमान स्थापित करता हुआ दिखाई दिया था।

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निष्कर्ष:-

दोस्तों आज के इस लेख में हमने ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध essay on global warming in hindi के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की है। जिसमे हमने अब तक जाना कि: ग्लोबल वार्मिंग क्या है?, ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण क्या हैं?, ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के तरीके क्या हैं?, ग्लोबल वार्मिंग का भविष्य में असर क्या होगा?, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन में सम्बंध क्या है?, ग्लोबल वार्मिंग का प्राकृतिक आपदाओं से सम्बंध क्या है?, और ग्लोबल वार्मिंग का मानव जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग से सम्बन्धित कुछ आंकड़े, इत्यादि। यह सब जानने के बाद अब हम यह जानेंगे कि इस पोस्ट से निष्कर्ष यानी कि conclusion क्या निकलता है।, तो आइए जानते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने का कारण कॉर्बनडाई ऑक्साइड का अधिक होना है और भी कई कारण हैं लेकिन उसमें कॉर्बन डाई ऑक्साइड मुख्य है तो ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए हमें कड़े से कड़ा कदम उठाना पड़ेगा।

अगर आप इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कुछ न कुछ प्रकृति के हित में ग्लोबल वार्मिग के रोकने के लिए कोई तरीका अपनाते हैं तो यह बहुत अच्छी बात होगी। क्योंकि अगर हर कोई कुछ न कुछ सहयोग करे तो ग्लोबल वार्मिंग के प्रकोप को रोका जा सकता है।

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